छत्तीसगढ़ का ‘बोरे-बासी’ छाया सोशल मीडिया पर ट्वीटर पर borebaasi नंबर-1 पर कर रहा है ट्रेंड

रायपुर : छत्तीसगढ़ का ‘‘बोरे-बासी’’ छाया सोशल मीडिया पर : ट्वीटर पर #borebaasi नंबर-1 पर कर रहा है ट्रेंड

फोटो : मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने श्रमिक दिवस के अवसर पर बीटीआई ग्राउंड में आयोजित राज्य स्तरीय श्रमिक सम्मेलन में बोरे बासी का आनंद लिया…

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज श्रम दिवस पर श्रमिकों के साथ बैठकर बोरे बासी खाया। मंत्रीगण, विद्यायकगण, निगम मंडल,आयोग के पदाधिकारियो ने श्रम दिवस के अवसर पर एक साथ बोरे बासी खाया।

बोरे – बासी यानी वाटर पुलाव

उन दिनों छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ आईएएस श्री सोनमणी वोरा जी की पहली पोस्टिंग दुर्ग में एसडीएम के पद पर हुई थी। चुस्त-दुरुस्त वोटा साहब सर्किट हाउस में रुके थे। सुबह-सुबह सर्किट हाउस के ही गार्डन में टहल रहे थे, एक पेड़ के नीचे •सर्किट हाउस का चौकीदार भोजन कर रहा था। वोरा साहब उसके पास से गुजरे तो उन्हें आश्चर्य हुआ, चौकीदार चाँवल में पानी डालकर खा रहा था। वोरा साहब नें चौकीदार से पूछा कि ये कौन सा डिश है। चौकीदार को पता था कि नये-नवेले आईएएस साहब आसाम से आए हैं उन्हें हिन्दी समझने में दिक्कत होगी तो उसने कहा ‘वाटर पुलाव’ है साहब।

वोरा साहब नें अपने मातहतों और अन्य आईएएस साथियों से इस संबंध में जिक्र किया तो उन्हें पता चला ‘वाटर पुलाव छत्तीसगढ़ का मुख्य भोजन है। तत्कालीन कलेक्टर शायद बी.एल. अग्रवाल नें उन्हें छत्तीसगढ़ के बासी के बारे में अच्छे से बताया। दुर्ग के प्रशासनिक हल्के में ‘वाटर पुलाव’ शब्द का प्रयोग कई वर्षों तक चलते रहा। आफिस के चतुर्थवर्ग कर्मचारी जब भोजन अवकाश के समय अपना टिफिन खोलकर बासी खाते तब वोरा साहब को याद करते और मुस्कुराते हुए कहते ‘वाटर पुलाव

पता नहीं छत्तीसगढ़ में बासी के लिए ‘वाटर पुलाव’ शब्द का प्रयोग कब से प्रारंभ हुआ किन्तु हम तो यही मानते हैं कि छत्तीसगढ़ के बासी को स-सम्मान मान ‘वाटर पुलाव’ कह कर सोनमणी वोटा जी ने ही दिया।

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