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UGC Bill 2026 in hindi विश्वविद्यालय अनुदान आयोग UGC बिल की पूरी जानकारी हिंदी में 2026 ugc bill kya hai

Published On: January 28, 2026
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UGC Bill 2026 in hindi विश्वविद्यालय अनुदान आयोग UGC बिल की पूरी जानकारी हिंदी में 2026 ugc bill kya hai

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग

अधिसूचना

नई दिल्ली, 13 जनवरी, 2026

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु)

विनियम, 2026

(यूआईएन: 1/2026)

फा. सं. 1-7/2011 (एससीटी). प्रस्तावना :

यद्यपि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा के मानकों का समन्वय एवं निर्धारण करने के लिए अधिदिष्ट एवं सशक्त किया गया है;

और यद्यपि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ‘पूर्ण समता एवं समावेशन’ को सभी शैक्षिक निर्णयों की आधारशिला के रूप में मान्यता देती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी छात्र शिक्षा प्रणाली में उन्नति कर सकें

और यद्यपि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग उच्च शिक्षा संस्थानों में धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म-स्थान के आधार पर या दिव्यांगजनों के विरुद्ध भेदभाव के उन्मूलन के प्रति प्रतिबद्ध है:

और यद्यपि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में समता को संवर्धन देना है।

अब, इसलिए, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु) विनियम, 2012 के प्रतिस्थापन द्वारा तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 की धारा 12 के खंड (ज) के साथ पठित धारा 26 की उप-धारा (1) के खंड (छ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एतद्वारा निम्नलिखित विनियम बनाता है, अर्थातः –

1. संक्षिप्त शीर्षक, प्रयोज्यता बऔर प्रारंभः

क. इन विनियमों का नाम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु) विनियम, 2026 (यूआईएन: 1/2026) होगा।

ख. ये भारत के सभी उच्च शिक्षा संस्थानों पर लागू होंगे।

ग. ये अधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होंगे।

2. उद्देश्यः

धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म-स्थान या दिव्यांगता के आधार पर विशेष रूप से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति, सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, दिव्यांगजनों अथवा इनमें से किसी के भी सदस्यों के विरुद्ध भेदभाव का उन्मूलन करना तथा उच्च शिक्षा संस्थानों के हितधारकों के मध्य पूर्ण समता एवं समावेशन को संवर्धन देना।

3. परिभाषाएँ:

(1) इन विनियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो-

क. “अधिनियम” का अर्थ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 (1956 का 3) है;

ख. “पीड़ित व्यक्ति” का अर्थ ऐसे व्यक्ति से है जिसके पास इन विनियमों के अंतर्गत शिकायतों से संबंधित या जुड़े मामलों में कोई शिकायत है,

ग. “जाति-आधारित भेदभाव” का अर्थ अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों के सदस्यों के विरद्ध केवल जाति या जनजाति के आधार पर भेदभाव है।

प. “आयोग” का अर्थ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 के तहत स्थापित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग है.

5. “भेदभाव” का अर्थ धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म-स्थान, दिव्यांगता या इनमें से किसी एक के आधार पर किसी भी हितधारक के विरुद्ध कोई भी अनुचित, भेदभावपूर्ण या पक्षपातपूर्ण व्यवहार या ऐसा कोई कार्य, चाहे वह स्पष्ट हो या अंतर्निहित ही। इसमें ऐसा कोई भी विभेद, बहिष्करण, प्रतिबंध या पक्षपात भी शामिल है जिसका उद्देश्य या प्रभाव शिक्षा में समान व्यवहार को निष्प्रभावी या अक्षम करना है और विशेष रूप से किसी भी हितधारक या हितधारकों के समूह पर ऐसी नर्तें लगाना है जो मानवीय गरिमा के प्रतिकूल हों।

च. “समता” से अर्थ सभी वैध अधिकारों के प्रयोग के संबंध में पाषता एवं अवसर के मामले में सभी हितधारकों के लिए एक समान अवसर का क्षेत्र है।

छ. “समता समिति” का अर्थ उच्च शिक्षा संस्थान के प्रमुख द्वारा मठित समिति है।

ज. “समता हेल्पलाइन” का अर्थ उभिधा संस्थान द्वारा स्थापित एवं संचालित एक हेल्पलाइन है,

ज्ञ. “समान अवसर केंद्र” का अर्थ उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा इन विनियमों के तहत स्थापित केंद्र है।

व. “संकाय सदस्य” का अर्थ उच्च शिक्षा संस्थान के लिए कार्य करने वाले शिक्षक हैं.

2. “लिंग” का अर्थ पुरुष, महिला और तृतीय लिंग सम्मिलित हैं;

3

8. “शिकायत” का बर्थ इन विनियमों के अंतर्गत भेदभाव के संबंध में एक पीड़ित व्यक्ति द्वारा की गई शिकायतें सम्मिनित हैं.

ड. “संस्थान का प्रमुख” का अर्थ विश्वविद्यालय के मामले में कुलपति या समविश्वविद्यालय (डीम्ड टू वी यूनिवर्सिटी), प्राचार्य या निदेशक अथवा संस्थान या महाविद्यालय के कार्यकारी प्रमुख के लिए प्रयुक्त ऐसा अन्य पदनाम है:

ड. “उच्च शिक्षा संस्थान” का अर्थ धारा 2 के खंड (च) के अर्थ के अंतर्गत एक विश्वविद्यालय, धारा 12क की उप-धारा (1) के खंड (ख) के अर्थ के अंतर्गत एक महाविद्यालय, तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 की धारा 3 के तहत घोषित समविश्वविद्यालय (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी संस्थान) है.

. “लोकपाल” का अर्थ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (छात्रों की शिकायतों का निवारण) विनियम, 2023 के तहत, समय-समय पर संतोधित, नियुक्त लोकपाल है,

त. “कर्मचारी” का अर्थ संकाय सदस्यों के अतिरिक्त, वे व्यक्ति हैं जो उच्च शिक्षा संस्थान के लिए कार्यरत हैं,

4. “हितधारक” का वर्थ छात्र संकाय सदस्यों, कर्मचारी, और प्रबंध समिति के सदस्य, जिसमें उच्च तिक्षा संस्थान का प्रमुख भी शामिल है;

द. “छात्र” का अर्थ किसी भी उच्च शिक्षा संस्थान में किसी भी माध्यम से, अर्थात् औपचारिक, मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा (ओडीएल), या ऑनलाइन के माध्यम से नामांकित, या नामांकन हेतु प्रवेश बाहने वाला व्यक्ति है।

ध. “विश्वविद्यालय” का अर्थ वेद्रीय अधिनियम, प्रांतीय अधिनियम या राज्य अधिनियम द्वारा या उसके तहत स्थापित या नमामेलित विश्वविद्यालय है और इसमें ऐसा कोई भी संस्थान शामिल है जिसे संबंधित विश्वविद्यालय के परामर्ने से, आयोग द्वारा अधिनियम के तहत इस निमित्त बनाए गए विनियमों के अनुसार मान्यता प्रदान की गई हो।

(2) इन विनियमों में प्रयुक्त किंतु यहां परिभाषित न की गई वे शब्द और पद जो अधिनियम या सामान्य उपबंध अधिनियम, 1897 में परिभाषित हैं, उनके वे अर्थ होंगे जो क्रमशः उस अधिनियम या सामान्य उपबंध अधिनियम, 1897 में, जैसी भी स्थिति हो, उनके लिए निर्दिष्ट किए गए हैं।

4. समता के संवर्धन का कर्तव्यः

(1) प्रत्येक उन शिक्षा संस्थान का

क. भेदभाव के उन्मूलन का कर्तव्य होगा;

५. हितधारकों के बीच समता के संवर्धन का कर्तव्य होगाः

ग. हितधारकों के विरुद्ध नेदभाव को उन्मूलन करने तथा उनकी जाति, सम्प्रदाय, धर्म, भाषा, जातीयता विंग या दिव्यांगता के पूर्वाग्रह के बिना उनके हितों की रक्षा के लिए उचित संरक्षात्मक एवं निवारक उपाय करेगा।

(2) कोई भी उड्नु शिक्षा संस्थान भेदभाव के किसी भी रूप की अनुमति नहीं देगा या उसे नजरबंदाज नहीं करेगा।

(3) यह सुनिश्चित करना संस्थान के प्रमुख का कर्तव्य होगा कि इन विनियमों का विधिवत होऔर इस उद्देश्य के लिए
उनके पास सभी यक लतियाँ होंगी।

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